सतना में आग से झुलसे मरीजों को बिना एसी वाली 108 एंबुलेंस से रेफर किए जाने के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। एंबुलेंसों के रखरखाव और मॉनिटरिंग की कमी भी सामने आई है।
सतना जिला अस्पताल का पीकू वार्ड असामाजिक तत्वों के निशाने पर है। 30 अगस्त की रात देव पंडित और उसके साथियों ने ड्यूटी कर रहे रेजीडेंट डॉक्टरों से अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद 31 अगस्त से 2 सितम्बर तक लगातार वार्ड में आकर डॉक्टरों के बारे में पूछताछ कर धमकियां दी जाती रहीं।
सतना जिला अस्पताल परिसर में जाम के कारण एंबुलेंस फंस गई, जिससे विषाक्त पदार्थ खाने वाली गंभीर महिला मरीज को परिजनों ने गोद में उठाकर भर्ती कराया। कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद यातायात व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। अस्पताल की अव्यवस्था से आमजन में आक्रोश।















